🦚 जय श्री कृष्ण — भगवान कृष्ण और खाटू श्याम
भगवान श्री कृष्ण ने ही बर्बरीक (खाटू श्याम बाबा) को कलियुग के महान देवता बनाया। महाभारत के युद्ध से पहले, बर्बरीक ने अपना शीश भगवान कृष्ण को दान किया। कृष्ण जी ने वरदान दिया कि कलियुग में बर्बरीक "श्याम" नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
भगवान कृष्ण और बर्बरीक की कथा
महाभारत काल में बर्बरीक (जो बाद में खाटू श्याम बने) एक महान योद्धा थे। उनके पास तीन दिव्य बाण थे जिनसे वे किसी भी युद्ध को तुरंत समाप्त कर सकते थे। कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ब्राह्मण वेश में बर्बरीक के पास आए और उनके शीश की भिक्षा माँगी। बर्बरीक ने बिना सोचे अपना शीश दान कर दिया। कृष्ण जी इस महान बलिदान से प्रसन्न हुए और वरदान दिया।
🙏 श्री कृष्ण का वरदान बर्बरीक को
"हे वीर! तुम्हारे इस महान बलिदान से मैं प्रसन्न हूँ। कलियुग में तुम मेरे नाम 'श्याम' से पूजे जाओगे। जो भक्त तुम्हारे द्वार आएंगे, तुम उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करोगे। तुम 'हारे का सहारा' कहलाओगे।" — भगवान श्री कृष्ण
जय श्री कृष्ण — भजन और स्तुति
जय श्री कृष्ण जय श्री श्याम।
दोनों मिलकर करते काम॥
कृष्ण का रूप है श्याम बाबा।
खाटू में बसे हैं अपने दाता॥
जय श्री कृष्ण जपो दिन रात।
श्याम की कृपा होगी साथ॥
जय श्री कृष्ण और जय श्री श्याम में अंतर
"जय श्री कृष्ण" — यह वृंदावन, मथुरा और गुजरात में विशेष रूप से प्रचलित अभिवादन है।
"जय श्री श्याम" — यह खाटू श्याम के भक्तों का विशेष अभिवादन है।
दोनों में कोई अंतर नहीं है क्योंकि "श्याम" स्वयं कृष्ण जी का नाम है। जो "जय श्री कृष्ण" बोलता है, वह "जय श्री श्याम" भी बोलता है।
जय श्री कृष्ण और जय श्री श्याम — दोनों नाम एक ही परमात्मा के हैं। खाटू श्याम मंदिर जाने वाले भक्त जब "जय श्री श्याम" बोलते हैं तो वे भगवान कृष्ण को ही याद करते हैं। यदि आप खाटू श्याम मंदिर के बारे में जानकारी चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर सभी जानकारी मिलेगी।