श्री कृष्ण ने बर्बरीक को "श्याम" क्यों कहा?
"श्याम" भगवान श्री कृष्ण का ही एक नाम है। श्री कृष्ण की त्वचा का रंग नीला-काला (श्याम रंग) था, इसलिए उन्हें "श्याम" कहा जाता है। जब श्री कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया, तो उन्होंने अपना ही नाम बर्बरीक को दिया — "श्याम।"
यह इस बात का प्रतीक है कि श्री कृष्ण ने बर्बरीक को अपने अंश के रूप में स्वीकार किया। खाटू श्याम बाबा कृष्ण के ही एक रूप हैं — इसलिए जो खाटू श्याम की पूजा करता है, वह श्री कृष्ण की ही पूजा करता है।
श्री कृष्ण और खाटू श्याम — समानताएं
| विशेषता | श्री कृष्ण | खाटू श्याम |
|---|---|---|
| युग | द्वापर युग | कलियुग |
| नाम का अर्थ | नीले-काले रंग वाले (श्याम) | कृष्ण का ही वरदान — श्याम |
| भक्तों की विशेषता | प्रेम भक्ति | विश्वास और समर्पण |
| मुख्य शिक्षा | गीता — कर्म योग | हार मत मानो, सहारा है |
| विशेष दिन | जन्माष्टमी | शुक्रवार और एकादशी |
| प्रसिद्ध स्थान | मथुरा, वृंदावन, द्वारका | खाटू, राजस्थान |
| मुख्य भजन | हरे कृष्ण महामंत्र | जय श्री श्याम |
खाटू श्याम को "जय श्री कृष्ण" क्यों बोलते हैं भक्त?
खाटू श्याम के कई भक्त "जय श्री श्याम" के साथ-साथ "जय श्री कृष्ण" भी बोलते हैं। इसके पीछे यही कारण है — खाटू श्याम और श्री कृष्ण एक ही हैं। जो श्याम की भक्ति करता है, वह कृष्ण की भक्ति करता है।
॥ श्लोक ॥
श्याम श्याम श्याम हरे, कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे।
एक ही परमात्मा है, भिन्न-भिन्न नाम धरे॥
जय श्री श्याम जय श्री कृष्ण, एक ही भक्ति का सार।
भक्त जो जाए शरण में, मिले सदा का प्यार॥
श्री कृष्ण और खाटू श्याम का यह दिव्य संबंध हमें बताता है कि ईश्वर एक है — बस रूप अलग-अलग हैं। "जय श्री कृष्ण" बोलो या "जय श्री श्याम" — दोनों एक ही परमात्मा की स्तुति है। राधे राधे! जय श्री श्याम!