एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो बार आती है — शुक्ल एकादशी और कृष्ण एकादशी। यह भगवान विष्णु का पवित्र दिन है। चूँकि खाटू श्याम बाबा विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के वरदान से प्रकट हुए हैं, इसलिए एकादशी का उनसे विशेष संबंध है।
साल की प्रमुख एकादशियाँ
| एकादशी का नाम | महीना | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| मोक्षदा एकादशी | मार्गशीर्ष (दिसंबर) | इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया था। |
| निर्जला एकादशी | ज्येष्ठ (जून) | बिना जल के रखा जाने वाला सबसे कठोर व्रत। |
| देवशयनी एकादशी | आषाढ़ (जुलाई) | भगवान विष्णु 4 महीने के लिए शयन करते हैं। |
| देवउठनी एकादशी | कार्तिक (नवंबर) | भगवान जागते हैं — इसे प्रबोधिनी भी कहते हैं। |
| पापमोचनी एकादशी | चैत्र (मार्च) | सभी पापों से मुक्ति मिलती है। |
| आमलकी एकादशी | फाल्गुन (मार्च) | खाटू श्याम मेले के समय आती है — विशेष महत्व। |
एकादशी व्रत विधि — खाटू श्याम के लिए
दशमी की रात से तैयारी
एकादशी से एक दिन पहले (दशमी को) रात में सात्विक भोजन करें और जल्दी सो जाएं।
एकादशी को ब्रह्ममुहूर्त में उठें
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और "जय श्री श्याम" का जाप शुरू करें।
व्रत का संकल्प लें
बाबा की तस्वीर के सामने व्रत का संकल्प लें — पूरे दिन अन्न नहीं खाएंगे।
फलाहार करें
दिन में केवल फल, दूध, मखाना और साबूदाना खा सकते हैं।
बाबा की पूजा करें
खाटू श्याम चालीसा, आरती और भजन गाएं। दीपक जलाएं।
द्वादशी को व्रत खोलें
अगले दिन (द्वादशी को) सूर्योदय के बाद पारण करें — व्रत खोलें।
खाटू श्याम के भक्त एकादशी पर विशेष रूप से मंदिर जाते हैं। यदि आप खाटू नहीं जा सकते, तो घर पर भी श्रद्धा से पूजा करें — बाबा की कृपा समान रूप से मिलती है। जय श्री श्याम!