शुक्रवार को श्याम बाबा का दिन क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम बाबा ने शुक्रवार के दिन भक्तों को वरदान दिया था कि वे इस दिन विशेष रूप से प्रार्थना सुनेंगे। खाटू गाँव में भी शुक्रवार को मंदिर में विशेष भीड़ होती है। मंदिर में इस दिन विशेष पूजा और आरती का आयोजन होता है।
शुक्रवार को शुक्र ग्रह का दिन माना जाता है जो धन, समृद्धि और वैभव का ग्रह है। खाटू श्याम बाबा "लखदातार" — धन और समृद्धि देने वाले — हैं। इसलिए यह संयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
शुक्रवार को खाटू श्याम पूजा विधि
सुबह जल्दी उठें (सूर्योदय से पहले)
शुक्रवार को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। पवित्र मन से दिन की शुरुआत करें।
पीले या केसरी वस्त्र पहनें
खाटू श्याम बाबा को पीला और केसरी रंग प्रिय है। इस दिन इन रंगों के वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल तैयार करें
बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने फूल, धूप, दीप, नारियल, पंचामृत रखें।
पंचामृत अभिषेक करें
दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से पंचामृत बनाकर बाबा को अभिषेक करें।
चालीसा और आरती पढ़ें
खाटू श्याम चालीसा का पाठ करें और आरती गाएं। फिर 108 बार "जय श्री श्याम" का जाप करें।
प्रसाद वितरित करें
बेसन के लड्डू या पंजीरी का प्रसाद बनाएं और परिवार व पड़ोसियों में बाँटें।
गरीबों को भोजन दें
शुक्रवार को जरूरतमंदों को भोजन कराएं — बाबा को यह विशेष रूप से प्रिय है।
शुक्रवार व्रत के नियम
सूर्योदय पर शुरुआत
व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। सुबह पहला भोजन पूजा के बाद ही करें।
सात्विक भोजन
इस दिन प्याज, लहसुन और मांस-मछली से परहेज करें।
पीला रंग
पीले फूल, पीले कपड़े और पीला प्रसाद — इस दिन विशेष शुभ है।
108 जाप
बाबा के नाम का 108 बार जाप जरूर करें — माला पर या मानसिक।
दीपक
शाम को सूर्यास्त के बाद घी का दीपक जलाएं।
क्षमा माँगें
दिन भर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए बाबा से क्षमा माँगें।
शुक्रवार का व्रत रखने से बाबा श्याम की विशेष कृपा होती है। यदि आप लगातार 21 शुक्रवार का व्रत रखते हैं, तो आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है — यह खाटू धाम के भक्तों की आस्था है। जय श्री श्याम!