श्याम की महिमा
लखदातार खाटू नरेश — अपार महिमा का वर्णन
क्यों कहा जाता है बाबा को लखदातार?
"लखदातार" — यानी लाखों को देने वाले। श्री कृष्ण ने बर्बरीक की असीम भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर कहा — "तुम कलियुग में लखदातार कहलाओगे। जो भी तुम्हारे पास आएगा खाली हाथ नहीं जाएगा।"
और सच में — खाटू श्याम के दरबार से कोई खाली नहीं जाता। चाहे धन हो, स्वास्थ्य हो, रिश्ते हों, या मन की शांति — बाबा सबको देते हैं। इसीलिए उन्हें "खाटू नरेश" और "दानवीर श्याम" भी कहा जाता है।
बाबा श्याम के 12 नाम और उनका अर्थ
वह जो सबको अपना मानते हैं, जो सर्वव्यापी हैं।
खाटू के राजा — खाटू गाँव के देवता।
लाखों को देने वाले — कभी किसी को खाली नहीं लौटाते।
जो हार गया, टूट गया — उसका सहारा।
उनका मूल नाम — महाभारत के महान योद्धा।
जिन्होंने अपना शीश दान दिया।
इस युग में सबसे शक्तिशाली देवता।
दीन-दुखियों पर दया करने वाले।
भक्तों से प्रेम करने वाले।
मन की इच्छाएं पूरी करने वाले।
जो चमत्कार करते हैं — असाध्य को साध्य बनाते हैं।
वह जो अत्यंत सुंदर हैं — कृष्ण का ही रूप।
श्याम महिमा — काव्य
लखदातार श्याम की महिमा, शब्दों में कहाँ समाए।
जो भी आए द्वार पे उनके, खाली न जाए॥
हारे का सहारा हो, दीनों के दाता श्याम।
कलियुग में भगवान बने, बर्बरीक ललाम॥
खाटू की पावन धरती पर, उनका वास है।
जो भी जाए दर पे उनके, भाग्य का प्रकाश है॥
तीन बाण के धनी थे, शीश दे दिया दान।
इसीलिए बने वे, जग में सबसे महान॥
खाटू श्याम बाबा की महिमा युगों-युगों तक गाई जाती रहेगी। उनकी भक्ति में कोई शर्त नहीं — बस सच्चा विश्वास चाहिए। "जय श्री श्याम" — इन तीन शब्दों में बाबा की पूरी महिमा समाई है। अपने जीवन में खाटू श्याम को आमंत्रित करें और देखें — जीवन बदल जाएगा।